रविवार, 8 जुलाई 2018

जिसे चाहो वह ठुकराता क्यों है?


अथातो भक्‍ति जिज्ञासा

ओशो...
तीसरा प्रश्न :-
भगवान, जिसे चाहो वह ठुकराता क्यों है?
      क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को आत्मरक्षा का अधिकार है। तुम्हारी चाहना, दूसरा भागता होगा, कि बचो भाई, यह आदमी आया! क्योंकि जंहा—जंहा लोगों ने चाहत देखी है, वहीं—वहीं बंधन पाए। और जहां—जंहा किसी के प्रेम में पड़े, वहीं फासी लगी।
      तुम्हारा प्रेम है क्या? बस वैसा ही है जैसा मछलीमार मछली पकड़ने के लिए काटे पर आटा लगाता है। मछली फंस जाती है, आटे के कारण। मछलीमार का प्रयोजन मछली को आटा खिलाना नहीं है; मछलीमार का प्रयोजन—आटा खाने में काटा फंस जाए उसके मुंह में, बस। आटा तो तरकीब है।
तुम पूछते हो—जिसे चाहो वह ठुकराता क्यो है;तुम्हारे चाहने में काटा है। तुम सोचते हो—आटा ही आटा है। लेकिन तुम जरा गौर से विचारो, तुमने जिसको चाहा उसका जीवन दुखमय बना दिया या नहीं? जिसने तुम्हें चाहा, उसने तुम्हारा जीवन दुखमय बना दिया या नहीं?
इस प्रेम के नाम पर जो चलता है, इसमें फूल तो कभी—कभार खिलते हैं, काटे ही काटे पलते हैं। कभी सौ में एकाध मौके पर कभी फूल की झलक मिली हो तो मिली हो, निन्यानबे मौकों पर तो काटा चुभा और बुरी तरह चुभा और नासूर बना गया, और घाव छोड़ गया। तुम्हारी चाहत शुद्ध नहीं है, इसलिए लोग बचना चाहते हैं।
      तुम यह मत समझो कि लोग कुछ गलत है। प्रश्न पूछने वाले की मर्जी यही है कि लोग कुछ गलत हैं, कि मैं तो इतना प्रेम का थाल सजाकर आता हूं और लोग चले, एकदम भागे—पुलिस को बुलाने लगते है—और मैं तो सिर्फ प्रेम का थाल सजाकर आया था। मैं तो कहता था, आरती उतारूंगा आपकी। आप चले क्यों?
तुम्हारे प्रेम के थाल में जहर है। हर वासना में जहर है। तुम अपनी वासना को प्रार्थना बनाओ, फिर कोई नहीं भागेगा। फिर लोग तुम्हें खोजते आएंगे; तुम्हारे पास बैठकर शांति पाएंगे, तुम्हारी छाया मे विश्राम पाएंगे; तुम्हारी आंख उन पर पड़ जाएगी, वे धन्यभागी हो जाएंगे। तुम अपनी वासना को प्रार्थना बनाओ।
      क्या मतलब है मेरा वासना को प्रार्थना बनाने से? वासना में जो ईर्ष्या है, उसे जाने दो; वासना में जो द्वेष है, उसे जाने दो; वासना में दूसरे के शोषण करने की जो आकांक्षा है, उसे जाने दो; वासना में दूसरे का मालिक बनने की जो वृत्ति है, उसे जाने दो; और तब तुम्हारी वासना शुद्ध होकर प्रार्थना बन जाएगी।
तब तुम दोगे और उत्तर में कुछ भी न मांगोगे। तब तुम प्रेम दोगे, उत्तर में कुछ भी न मांगोगे। तब तुम्हारे प्रेम मे सिर्फ आटा होगा, काटा नहीं होगा।
अथातो भक्‍ति जिज्ञासा (भाग--1) प्रवचन--12♣

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